वास्तु शास्त्र वास्तुकला और निर्माण का एक प्राचीन विज्ञान है। वास्तु शास्त्र का प्राथमिक उद्देश्य मानव की वास्तुकला पर प्रकृति के नियमों के प्रभाव का अध्ययन करना। वास्तु शास्त्र, लेआउट, माप, जमीन तैयार करने, अंतरिक्ष(खुला स्थान) व्यवस्था, स्थानिक ज्यामिति और स्थापत्य कला के अन्य पहलुओं को डिजाइन करने के लिए संबंधित सिद्धांतों का वर्णन है और मनुष्य और प्रकृति के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन सुनिश्चित करता है। वास्तु शास्त्र की मदद से एक घर के निर्माण, व्यावसायिक परिसर या मंदिर, द्वार, दरवाजे और कमरे आदि की दशा और दिशा के लिए बेहतर और शुभ रास्ते के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं जो स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और खुशी प्रदान करेगा।
शब्द 'वास्तुशास्त्र' संस्कृत के मूल शब्द 'वास' जिसका अर्थ 'रहते हैं' और 'शास्त्र' जिसका अर्थ ' प्रणाली ' से व्युत्पन्न है। वास्तु का पहला उल्लेख पवित्र पुस्तक यजुर्वेद, जो कि हिंदुओं का 5000 साल पुराना दिव्य पाठ है, में पाया जाता है।

वास्तु शास्त्र के तत्व




वैदिक साहित्य के अनुसार, पूरा ब्रह्मांड पांच मूल तत्वों (जिन्हें 'पंच-महाभूत' के रूप में जाना जाता) से बना है, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश । मानव शरीर भी इन तत्वों से बना है।
हमारे बाह्य और आंतरिक 'पंच-महाभूत' में किसी भी प्रकार के असंतुलन को, वास्तु शास्त्र दुखःकारी स्थिति मानता है। वास्तु शास्त्र हमें सिखाता है कि कैसे हमारे आंतरिक और बाहरी 'पंच-महाभूत' के असंतुलन को दूर करके एक शांतिपूर्ण और तनाव मुक्त जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है। ये पांच तत्व हैं-
पृथ्वी (भूमि): -
पृथ्वी (भूमि) वास्तु में सबसे महत्वपूर्ण तत्व है और हर तरह से मानव जीवन को प्रभावित करता हैं। पृथ्वी अपने गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय गुणों के लिए जाना जाता है। पृथ्वी पर सब कुछ, जीवित और निर्जीव इसके अपने चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण बल का काफी प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि पृथ्वी तत्व एक संतुलन स्थिति में है तो यह जीवन में स्थिरता लाती है।
पानी (जल):-
जल वास्तु में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण तत्व है और उत्तर-पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए पानी के तत्वों जैसे- पानी की टंकी, आने वाले पानी की लाइन उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जाना चाहिए। मात्रात्मक रूप में यह पांच तत्वों में सबसे बड़ा है एवं हमारे शरीर का 80% और पृथ्वी की सतह का दो-तिहाई से अधिक पानी है। वास्तु शास्त्र में पानी नई अवधारणाओं के निर्माण के साथ जुड़ा हुआ है और जब पानी संतुलित है, यह जीवन का व्यापक दृष्टिकोण और समृद्धि लाता है।
आग (अग्नि): -
वास्तु शास्त्र में, आग (अग्नि) प्रकाश और गर्मी का प्रतिनिधित्व करता है जिसके बिना जीवन असंभव है। प्रकाश जीवन का सार है और सूर्य प्राकृतिक प्रकाश दाता है अतः वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में आने वाली सूर्य की रोशनी के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। सूर्य का प्रकाश सभी सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। वास्तु शास्त्र में दक्षिण पूर्व दिशा आग या अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए वे सभी जिनमे आग का तत्व है जैसे- है रसोई या बिजली के उपकरण, दक्षिण पूर्व दिशा में रखा जाना चाहिए।
हवा (वायु): -
वायु हमारे अस्तित्व के लिए मौलिक तत्व है। वायु जीवन में वृद्धि, मानसिक स्थिरता और खुशी का प्रतिनिधित्व करता है। वायु उत्तर-पूर्व दिशा का एक तत्व है। वास्तु शास्त्र वायु तत्व के संतुलन के लिए और संरचना के भीतर हवा के अच्छे प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए, दरवाजे, खिड़कियों, कृत्रिम वायु-पारागमन, बालकनियों, ढांचे की ऊंचाई और पेड़ों और पौधों को लगाने क स्थान सम्बन्धित विधियों का वर्णन करता है।
आकाश (खुला स्थान): -
आकाश अन्य चार मूलभूत तत्वों को आश्रय प्रदान करता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, एक घर में, आकाश तत्व केंद्रीय भाग या 'ब्रह्मा स्थान' अर्थात 'ब्रह्मा- विश्व का निर्माता' का प्रतिनिधित्व करता है और यह विकास और प्रगति से संबंधित है। अतः आकाश तत्व में कोई भी गड़बड़ी विकास और प्रगति के लिए हानिकारक साबित होता हैं। यह महत्वपूर्ण है कि 'ब्रह्मा स्थान' को खुला रखा जाये ।"

Elements of Vastu
वास्तु शास्त्र में दिशाएं पूजा घर के लिए वास्तु नियम शयनकक्ष के लिए वास्तु नियम रसोई के लिए वास्तु नियम भोजनकक्ष के लिए वास्तु नियम बाथरूम के लिए वास्तु नियम बैठक कक्ष के लिए वास्तु नियम अध्य्यन कक्ष के लिए वास्तु नियम भूखंड की आकृति और माप के लिए वास्तु नियम शयनकक्ष के लिए फेंगशुई रसोईघर के लिए फेंगशुई लाफिंग बुद्धा बांस का पौधा चीनी सिक्के धन मेंढक फेंगशुई क्रिस्टल हैंगिंग बॉल फेंग शुई ड्रैगन फेंगशुई दौड़ता घोड़ा फेंगशुई इच्छा गाय फेंगशुई रंगीन मछली फेंगशुई मंदारिन बत्तख फेंगशुई उल्लू फेंगशुई पवनघंटी फेंग-शुई शैक्षिक टॉवर फेंगशुई धन वृक्ष फेंग शुई बहुरंगी ड्रैगन बोट फेंगशुई तीन स्तरीय कछुआ फेंगशुई बागुआ दर्पण मुख्य प्रवेश द्वार के लिए वास्तु नियम
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